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Babasaheb Dr Ambedkar aur Simon Commission ( Hindi )
Babasaheb Dr Ambedkar aur Simon Commission ( Hindi )
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साइमन कमीशन (Simon Commission) ब्रिटिश सरकार ने भारत में संवैधानिक सुधारों की समीक्षा करने के लिए 1927 में नियुक्त किया था। इसका आधिकारिक नाम Indian Statutory Commission था और इसके अध्यक्ष सर जॉन साइमन थे।
बाबासाहेब की भूमिका क्या थी?
उस समय कई भारतीय राजनीतिक दलों ने साइमन कमीशन का विरोध किया, क्योंकि इसमें एक भी भारतीय सदस्य नहीं था। लेकिन डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने बहिष्कार के बजाय कमीशन के सामने जाकर दलित और वंचित वर्गों की समस्याएँ और राजनीतिक अधिकार मजबूती से रखे।
बाबासाहेब ने विशेष रूप से मांग रखी कि:
- दलित वर्गों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिले।
- विधानसभाओं में आरक्षित सीटें हों।
- वंचित वर्गों को प्रशासन और शिक्षा में अवसर मिलें।
- सामाजिक भेदभाव और अस्पृश्यता के खिलाफ प्रभावी सुरक्षा मिले।
- दलितों को अपनी राजनीतिक आवाज़ रखने का स्वतंत्र अधिकार मिले।
महत्वपूर्ण बात: बाबासाहेब का साइमन कमीशन के सामने जाना यह दिखाता है कि वे केवल विरोध की राजनीति नहीं, बल्कि संवैधानिक माध्यम से अपने समाज के अधिकार सुरक्षित कराने की रणनीति पर भी काम कर रहे थे।
Author : Dr B R Ambedkar
Pages : 230
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